Friday, January 20, 2012

एक आशा

हम अबोलों को कोई तो बोल देगा 
आंसुओं का भी कोई तो मोल देगा 
हंस कर अँधेरी घाटियाँ जो पार कर ली 
सूरज उजालों का खजाना खोल देगा 
अंतिम छनो तक टूटने से बच सके तो 
यह वक्त हीरे मोतियों से तोल देगा 
एक दिन मीठे स्वरों का आगमन होगा 
और इन कानों में अमृत घोल देगा .
                                 "चरण"

1 comment:

  1. बहोत अच्छा लगा आपका ब्लॉग पढकर ।

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