Wednesday, August 31, 2011

अब हमें नपना नहीं हैं


यहाँ धधकती आग में मत कूदिये
यह शहर अपना नहीं है
कागजी फूलों की रक्षा के लिए
धूप में तपना नहीं है
सामने जो वृक्ष पर आंते तंगी हैं
सत्य है सपना नहीं है
आजकल हर रोज घटते जा रहे हैं
अब हमें नपना नहीं है .
                                "चरण"

एक मुट्ठी में सिमट कर रह गया है आसमा

एक मुट्ठी में सिमट कर रह गया है आसमा
अब बेचारे चाँद तारे पैर फैलाएं कहाँ
बिल्डिंगों के मोह में जो फूंक आये झोंपड़े
अब बताओ लौट कर जाएँ तो वे जाएँ कहाँ
बीच में चट्टान है चारों तरफ है खाइयां
रास्ता कोई नहीं अब भाग कर जाएँ कहाँ
कल तलक तो खून का इल्जाम लादे फिर रहे थे
अब बताओ आपने वे वस्त्र धुलवाए कहाँ
हर जलाशय पर बिठा रखे हैं अपने पहरुवे
शर्म लगती है मगर अब डूबने जायें कहाँ .
                                                      "चरण"
किस किस को याद कीजिये किस किस को रोईए
आराम बड़ी चीज है मुह ढांक कर सोईये .
                                                   "चरण"
लड़कियां कुछ भी लिखती हैं तो बेसुमार कमेंट्स मिलते हैं
आदमी मर के लिखते हैं तो भी चर्चे  नहीं होते .
                                                              "चरण"

Tuesday, August 30, 2011

दल बदल

दल बदल
आपसे मिलकर के हम फिर से सबल हो जायेंगे
आप घोड़े ही रहो हम अस्तबल हो जायेंगे
आज  अपना लो हमें हम आपके आधीन हैं
वर्ना ये दल छोड़कर फिर दल बदल हो जायेंगे
खोटे सिक्के ही सही किन्तु हमें उम्मीद है
आपके प्रताप से हम फिर शायद चल जायेंगे
एक अवसर और दो तो हाथ कुछ दिखलायें हम
आपके सारे विरोधी आग में जल जायेंगे
इसलिए फिर से जमीं पर थूक कर हम चाटते हैं
आपके अहसान से बच्चे मेरे पल जायेंगे .
                                               "चरण"

बिल


एक रात
जब सारी जनता सो रही थी
तब
सेठ फूलचंद
और उनके मुनीम घासीराम के बीच
व्यापार की बातें हो रहीं थीं
मोहन का बिल बन गया
जी हाँ
सोहन का बिल बन गया
जी हाँ
खच्चू का बिल बन गया
जी हाँ
बच्चू का बिल बन गया
जी हाँ
और किस किस का बिल बन गया
जी सबका बिल बन गया
उनके इस मधुर वार्तालाप को
ओट में खड़े कुछ चूहे सुन रहे थे
और अपना सर धुन रहे थे
लो अब मनुष्य के भी बिल बनने लगे
ये भी हमारी ही छाती पर दाल दलने लगे
जब आदमी ही बिल में रहने आयेंगे
तो चूहे बेचारे कहाँ जायेंगे .
                               "चरण"

कसौटी


एक संभ्रांत नागरिक 
पास खड़ी
मैली कुचैली /काली कलूटी
महिला की प्रशंसा कर रहा था
यह
मेरी /सबसे छोटी पुत्र वधु है
बहुत ही सुशील है /बहुत ही सुंदर है
बहुत ही साफ़ सुथरी है
पास खड़े हुए / एक सज्जन ने कहा
लगता है
जरुर
दहेज़ की कसौटी पर खरी उतरी है .
                                       "चरण"
मेरे आँगन में इस बरसात में बरसे हैं सांप
डरता हूँ बाहर आते ही डस लेंगे सांप .
                                               "चरण"

Monday, August 29, 2011

सूरजमुखी का फूल


सूरजमुखी का फूल बनके जी रहे हैं हम
कैसी विडम्बना है की विष पी रहे हैं हम
लो भोर हो गयी की हम जागने लगे
सूरज की ओर दोस्तों फिर ताकने लगे
अब शाम तक के वास्ते फिर जी रहे हैं हम
कैसी विडम्बना है की विष पी रहे हैं हम
न मोक्ष की चाहत हमें न त्याग भावना
मजबूरियों में कर रहे हम गम का सामना
अंधी गुफा में जिंदगी को जी रहे हैं हम
कैसी विडंबना है की विष पी रहे हैं हम
सपनो में शहंसा बने और दिन में लुट गए
सपनो के राज दोस्तों सपनो में छुट गए
सपनो के चीथड़ों को फिर से सीँ रहे हैं हम
कैसी विडम्बना है की विष पी रहे है हम
आओ की वक्त हो गया पंखुड़ी समेत लें
अब जिंदगी की रेख को हम खुद ही मेट लें
नागों की छत्रछाओं में अब जी रहे हैं हम
कैसी विडंबना है की विष पी रहे हैं हम .
                                                    "चरण"
हम हैं कितने भोले
चुपचाप बैठे देख रहे हैं शोले .
                                   "चरण"
अन्ना जी अब भूख लगी है रोटी दो .
                                             "चरण"
भयभीत हो चौराहों पर आने लगे हैं सांप
बौखलाहट में फन उठाने लगे हैं सांप .
                                               "चरण"

Sunday, August 28, 2011

कौन कहता है मेरा महबूब गंजा है
भला कहीं चाँद पर भी बाल हुआ करते हैं
                                                  "चरण"
इतना नहीं है भय "चरण "
जंगल की आग  से
जितना कि खतरा है हमें
घर के चिराग से .

Saturday, August 27, 2011

जंगल के सभी जानवरों को
मेरी हार्दिक शुभ कामना है
क्योंकि
अब उनके
मनुष्य बनने की पूरी संभावना है .
                                 "चरण"

Friday, August 26, 2011

पर लगा के उड़ गयी है नींद दोस्तों .
                                              "चरण"
जंगल में मोर नाचा किसने देखा .
                                          "चरण"
रिश्वतें ले चल रही हैं अब हवाएं .
                                         "चरण"

Thursday, August 25, 2011

एक सृंगार रस के कवि की धूमधाम से शादी हुयी  सब कुछ हो जाने के बाद विदाई का समय आ पहुंचा लड़की की सारी सखी सहेलियों ने कवि महाशय को घेर लिया और रोने लगीं कहने लगीं जीजू हमने अपनी बहन को बहुत लाड प्यार से पाला है उसको कभी किसी बात के लिए दुखी नहीं किया यहाँ तक की कांटे तो उसने सपने में भी नहीं देखे और अब मजबूर होकर हमें इसको आपके हवाले करना पड़ रहा है इसे ध्यान से संभालना उनकी बातें सुनकर कवि महाशय का दिल भी भर आया  उनकी आँखों में आंसू छलक आये और रुआंसे होकर बोले सालियों तुम्हारा जीजू इतना गया बीता नहीं है मैं आपको भरोसा दिलाता हूँ  की आज तक यह तुम्हारी बहन थी किन्तु आज से यह मेरी बहन है .
               "चरण"
हम उनकी याद में इतना रोये इतना रोये की आंसुओं से टब भर गया और वे कमबख्त ऐसे निकले की उसमें नहा कर चले गए .
                                    "चरण"
जब दूध सस्ता मिलता हो  ,तो भैंस पालने की क्या जरुरत है .
                                                                              :चरण:
जब दूध सस्ता मिलता हो  ,तो भैंस पालने की क्या जरुरत है .
                                                                              :चरण:
.
आईने की खता है यही
उसने सूरत दिखा दी सही .
                             "चरण"

Wednesday, August 24, 2011

एक बार फिर लुटिया डुबो दी .

Tuesday, August 23, 2011

तेरी कातिल अदा


तेरी हर एक अदा दिल में समाती जा रही है
सांझ से था पथ निहारा अब रात बीती जा रही है
जुल्फ में कुछ इस तरह रंगीन रौनक है तेरी
एक छन् उधर जो देख ले बिसरा कभी सकता नहीं
गुलशन के हर इक पुष्प में जो गंध है वह गंध है तेरी
फँस कर कभी ये प्रीत भंवरा फिर निकल सकता नहीं
चाल तेरी दिल को मेरे क़त्ल करती जा रही है
साँझ से था पथ निहारा अब रात बीती जा रही है
प्रात की लाली गवाह है जबकि तूने यह कहा था
आज चाहे कुछ भी हो मै साथ में तेरे रहूँगी
उसी छन् से आज मै कई बार खिड़की झांकता हूँ
सोचता था आज तू दिल की सदा सब कुछ कहेगी
आ भी जा अब तो सभी उम्मीद मिटती जा रही है
साँझ से था पथ निहारा अब रात बीती जा रही है
घर घर हुए रोशन दियों की टिमटिमाती रौशनी से
आकाश ने तारा गणों को संग लेकर गीत गाया
खुश हैं सब भूतल के प्राणी मिलके अपने मीत से
और किसी रमणी के सर में मीत ने गजरा सजाया
कैसे बुझाओं दिल में मेरे आग लगती जा रही है
साँझ से था पथ निहारा अब रात बीती जा रही है
हमदम मेरे क्या आज तक तू मुझसे इतनी दूर है
तू चाहे मुझको भुला दे मैं भुला सकता नहीं
आज तू न आ सकी शायद तू भी मजबूर है
वर्ना मुझे देखे बिना तू रुक कभी सकती नहीं
रात भर आहें मेरी करवट बदलती जा रही हैं
साँझ से था पथ निहारा अब रात बीती जा रही है .
                                                             "चरण"
 .
                                                            
क्रांति का पौधा लगा दिया हमने
अपना फ़र्ज़ निभा दिया हमने .
                                 "चरण"
ऐसा क्या करें की पत्नी दिन भर चहकती रहे मुस्कुराती रहे .
                                                                          "चरण"
शेर भूखा मर जायेगा लेकिन घास नहीं खायेगा .
                                                        "चरण"A

Monday, August 22, 2011

मैना

एक राजसी ठाठ बाट वाली बुढ़िया
चौराहे पर बैठी
आने जाने वालों से पूछ रही थी
किसी ने मेरी मैना को देखा है
मेरी मैना
अवसर पाकर पिंजड़े से उड़ गयी है 
लगता है
पक्छियों के दूसरे झुण्ड से जुड़ गयी है
जो उसका पता बताएगा
भारी इनाम पायेगा
जो उसे जिन्दा या मुर्दा पकड़ कर लायेगा
आधा राजपाट पायेगा
यह देख कर
हमारा सर चकराया
कुछ समझ में नहीं आया
एक मामूली पक्छी
मैना के लिए इतनी चिंता
हमने उनके चरणों में शीश नवाकर
पूछा
माता जी
हम आपकी
इस दशा को देखकर बहुत हैरान हैं
एक मामूली मैना के लिए
आप इतनी परेशान हैं
उन्होंने मेरा सर ऊपर उठाते हुवे कहा
बेटे
तुम नहीं जानते
वह मैना
बोलना जानती है
पक्छियों के दूसरे झुण्ड के दबाव में आकर
या
चिकनी चुपड़ी बातों में आकर
कुछ भी बोल सकती है
मेरे घर के
दबे ढके
सारे राज खोल सकती है .
                              "चरण"
घोडा घास से दोस्ती करेगा तो खायेगा क्या .
                                                       "चरण"

Sunday, August 21, 2011

आशीर्वाद


एक असहाय बुढिया
ठोकर खाकर सड़क पर गिर पड़ी
पूरी कोशिस के बाद भी
हो नहीं पाई खड़ी
तभी पास से
एक नौ जवान गुजरा
उसने सहारा देकर
बुढिया को उठाया
अपनी इंसानियत का
परिचय दिलाया
बुढिया
भाव विभोर होकर बोली
बेटे
जीवन में बहुत सुख पायेगा
जैसे तुने मुझे उठाया है
वैसे ही
भगवान्
तुझे भी उठाएगा .
                    "चरण"

अपशगुन

अपशगुन
एक दिन शाम को
थकी हारी बिल्ली
लौट कर अपने घर आई
बच्चों को सकुशल देखकर
मन ही मन मुस्कुराई
भूख से बिलबिलाते बच्चों ने
पास आकर पूछा
मम्मी
आज
बहुत देर से लौटकर घर आई हैं
बताओ
हमारे लिए क्या क्या लायी हैं
बिल्ली ने लम्बी साँस खींच कर कहा
आज तो खाली हाथ ही आई हुईं
गनीमत है
अपने आप को बचा लायी हूँ
घर से निकलते ही
अपशगुन हो गया था
एक आदमी
मेरा रास्ता काट गया था .
                                "चरण"
सबके चश्मे बदल जायेंगे धीरे धीरे
सब उसी राह पर आ जायेंगे धीरे धीरे
कुछ विनाश कर गए पहले वाले
शेष ये कर जायेंगे धीरे धीरे .
                                 "चरण"

Saturday, August 20, 2011

हम तो डूबेंगे सनम ,तुम्हे साथ ले के डूबेंगे .
                                                         "चरण"

Friday, August 19, 2011

भेद भाव

भेद भाव
बहुत समझदार  है यह पूंजीपति वर्ग
पृथ्वी पर ही बना दिया है स्वर्ग और नर्क
खोद दी है गहरी खाई
ताकि एक दुसरे से न मिल पाएं भाई भाई
एक को बना दिया है मजदूर
दुसरे को अफसर
एक को गाली से संबोधन
दुसरे का संबोधन सर
मूल में दोनों एक ही हैं मजदूर
भूल में दोनों अलग अलग हैं
एक दुसरे से बहुत दूर
दोनों ही का एक मकसद है
दोनों ही की मंजिल एक है
रोटी कपडा और मकान
चाहे इधर से पकड़ो
चाहे उधर से पकड़ो
कान है आखिर कान
दोनों ही के आँगन में
एक ही दिन होती है बरसात
एक ही दिन चमकता है
पूर्णमासी का चाँद
एक ही दिन टूटता है
दोनों के धीरज का बांध
हफ्ते भर बाद
पुनः होने लगता है
दोनों ही के आँगन में वास्पीकरण
दोनों ही को लेनी पड़ती है
लाला करोड़ीमल की शरण
फिर भी दोनों के दरमियान
बढ़ता रहता है अंतर
पूंजीपति निरंतर
फूंकते रहते है मंतर
थमा देते हैं कुछ के हाथों में
अतिरिक्त सुविधाओं का गुलदस्ता
कहते हैं चुपचाप सूंघते रहो
हमारे ही कदमो में ऊंघते रहो .
                                     "चरण"
आसमान से टपके और खजूर में अटके .
                                                 "चरण"

Thursday, August 18, 2011

प्रेमिका जो देती है उसे हम प्यार कहते हैं ,
पत्नी से जो मिलती है उसे फटकार कहते हैं ,
जो धक्का देके चलती है उसे हम कार कहते हैं ,
जो धक्के से भी न सरके उसे सरकार कहते हैं .
                                   {स्वर्गीय गोपाल दास व्यास }

पति पत्नी और वह


एक दिन
बैठे बिठाये हमें शौक चर्राया
संजीव कुमार की तरह
रोमांस करने का विचार आया
हमने आव देखा न ताव
सेक्रेटरी से पूछने लगे प्रेम का भाव
उसने भी सहानुभूति दर्शाई
और कहा
आओ मेरे गले लग जाओ
दोस्तों ने कहा
क्या किस्मत पाई है
बिलकुल संजीव कुमार का भाई है
थोड़े दिनों बाद
वही हुआ जो होता है
अपने देश का आशिक अंत में रोता है
क्योंकि
हमारा रोमांस भी पिछले रोमांस की कड़ी थी
इसलिए
पत्नी हाथ में  चप्पल लिए खड़ी थी
इधर पत्नी ने प्रेमिका को ललकारा
उधर हमने प्रेमिका को पुचकारा 
और उसका हौशला बढाया
पत्नी को चित्त करने का
आजमाया हुआ नुस्खा बताया
पहले तो हमारी प्रेमिका सकपकाई
सामने खड़ी रणचंडी को देख कर घबराई
फिर अविलम्ब
शुरू हो गयी हाथापाई
थोड़ी ही देर में
प्रेमिका ने लुट्या दुबबाई
यहाँ भी पत्नी ने ही विजय पाई

किन्तु यह क्या
पत्नी के हाथ में
प्रेमिका के नकली बालों का विग
और जमीन पर नकली दांतों का सैट
मेरे पैरों के नीचे से जमीन फिसली
हाय प्रेमिका तो पत्नी से भी बूढी निकली .
                                                     "चरण" "
कभी मेरी गली आया करो
                                    "चरण"

Wednesday, August 17, 2011

एक तो करेला वह भी नीम चढ़ा .
                                           "चरण"

Tuesday, August 16, 2011

यह दृष्टी केंद्र पर से हट न जाये

यह दृष्टी केंद्र पर से हट न जाये
जब तलक दूरी दिलों की घट न जाये
इस दिये को जख्म से कुछ दूर रखना
आंच पाकर दर्दे बम कहीं फट न जाए
रोकिये बच्चों से जय जय घोष करवाना
ये गालियाँ इन बालकों को रट न जायें
हो गए सक्रिय फिर से स्वार्थी बन्दर
आपके हिस्से की रोटी बंट न जाये
हम इसी चट्टान पर बैठे रहेंगे
जब तलक पूरा कुहांसा छंट ना जाए .
                                                     "चरण"

क्यों राह में यूँ ऱोपकर पौधे गुलाब के

क्यों राह में यूँ ऱोपकर पौधे गुलाब के
रुख मोड़ने लगे हो तुम मेरे ख़्वाब के
इस वास्ते हमने अभी निर्णय नहीं किया
हम इन्तेजार में थे मुक्कमल जवाब के
जिस शक्ल पर चिपकी हुयी हैं मुस्कुराहटें
है आंसुओं से तरबतर पीछे नकाब के
जिन पर लिखी हुयी थी मेरी दर्दे दास्तान
पुड़ीयों  में ढल रहे हैं वे पन्ने किताब के
इस गाँव भर का खून सुखाने के बावजूद
नखरे अभी भी बरक़रार हैं तालाब के .
                                                        "चरण"
चढ़ जा बेटा शूली पर राम भली करेंगे .
                                                    "चरण"

Monday, August 15, 2011

अजगरों के चल रहे आदेश मेरे देश में

मौन होते जा रहे हैं लोग मेरे देश में
अजगरों के चल रहे आदेश मेरे देश में
कल मुखौटा गिर गया तो हमने पहचाना
आप ही हमको मिले थे देवता के वेश में
रोकिये अब रोकिये यह मंत्रोचारण
बहुत कुछ हम सह रहे हैं मात्र भावावेश में
वक्त की पुकार है यह तक्त छोडिये
आप फिट होते नहीं हैं आज के परिवेश में .
                                                      "चरण"

आत्म समर्पण के बाद


एक डाकू ने
स्वेच्छा से आत्म समर्पण कर दिया
अदालत ने थोड़ी सी सजा देकर
उसे रिहा कर दिया
रिहाई के बाद
जब वह
जेल के फाटक पर आया
तो वहां
अपने स्वागत में
कई राजनैतिक पार्टियों के
नेताओं को खड़े पाया
सबने बारी बारी से उसे गले लगाया
चमचों ने
जय जय कार का नारा लगाया
हर नेता ने
अपने अपने ढंग से
उससे अनुरोध किया
आप महान हैं
अनुभवी हैं
आपको देश के काम आना चाहिए
अब
राजनीती में
अपने जौहर दिखाना चाहिये .
                                    "चरण"

संदेह नहीं


संदेह नहीं की आप पूजे जाएंगे
कालांतर में देवता कहलायेंगे
किन्तु धिक्कारेगा जब स्वयं का विवेक
क्या करेंगे किस तरह समझायेंगे
निश्चिन्त होकर जिंदगी रंगीन करिए
एक दिन तो कर्म का फल पायेंगे
ढल रही है उम्र साग पात पर आ जाइये
आदमी का मांश कब तक खायेंगे
अन्याय और भूख की उपेक्छा कर
कुर्सियों के गीत कब तक गायेंगे
तुम मदारी हो चलो हम मान गए
ये करिश्मे कब तलक दिखलायेंगे
जंगल नुमा इस शहर में कोहराम होगा
सोते हुए शेरों गर जगायेंगे .
                                      "चरण"
लड़ने के लिए इतना बहाना ही बहुत है ,
कद्दू की  बेल क्यों मेरी छत पर चढ़ाई है .
                                                   "चरण"

Saturday, August 13, 2011

तरस गया हूँ वर्षों से राखी  बंधवाने को ,
अब बहूत दूर रहती है मुझसे मेरी बहना .
बचपन में जो सुबह शाम दिन रात हंसाती थी ,
अब पल पल मुझे रुलाती है वह प्यारी बहना .
भूख नहीं न प्यास मुझे न नींद ही आती है ,
चुपचाप अकेले सह लेंगे अब किससे क्या कहना .
तरस गया हूँ वर्षों से राखी बंधवाने को ,
अब बहूत दूर रहती है मुझसे मेरी बहना .
                                                    "चरण"
जो मिट्टी  लहू से सींची जाती  है ,
उसमें गुलाब की फ़सल बहुत अच्छी  आती है ,
यह बात अब मेरी समझ में  गयी है ,
क्यों इस देश में गुलाब की संतान छा गयी है .
                                                             "चरण"

Friday, August 12, 2011

एक गीत देश के नाम

इस देश को महान बनायेंगे हम इस देश को खुशहाल बनायेंगे
---ये देश है गाँधी ने जिसे प्यार किया
     अपनी समस्त जिंदगी को वार दिया
     ये देश है नेहरू ने जिसे प्यार किया
     इसके हर एक स्वप्न को साकार किया
इस देश को गुलजार बनायेंगे हम
इस देश को महान बनायेंगे हम
---यह देश है या वीरता की खान है
    यह देश सारे विश्व में महान है
     इस देश को झुका नही सकता कोई
      इस देश पर हिमा  महेरबान है
इस देश को दिलदार बनायेंगे हम
इस देश को महान बनायेंगे हम.
---धरती ने पुकारा कि इसे प्यार करो
      आकाश  पुकारा कि इसे प्यार करो
        सूरज ने कहा    चाँद  सितारों ने कहा
         ये देश तुम्हारा है इसे प्यार करो
इस देश के सुर ताल  मिलायेंगे हम
इस देश को महान बनायेंगे हम .
                                           "चरण"

स्वतंत्रता कि इस बेला में

स्वतंत्रता कि इस बेला में
उन सबका सम्मान करें
जिनके रक्त से रंजित  धरती
उन वीरों का ध्यान करें .
भारत मा के गहने उतरे
हत्करियान पहना थी
एक लहर पश्चिम से चलकर
भारत भू पर आई थी
जिसने अत्याचार के पर
अपनी ध्वजा फहराई  थी
अपने घर में घुसे विदेशी
अपना ही अपमान करें .
मा को मा कह पाने का जब
हमको कोई अधिकार नही था
मा के चरण स्पर्श करें हम
ऐसा कोई त्योहार नहीं था
एक सुहागन के माथे पर
कुम कुम या सिंदूर नहीं था
राखी  के दिन राखी  पकड़े
और नयनो  में नीर  भरे .
कफन बाँध कर निकल  पड़े जब
दी-मा ने सौगंध दूध की
मा के आँसू फूल  बन गए
सुनकर के हुंकार पूत  की .
लहु  के सोते बह निकले तब
आजादी के दीवानों से
किसी के अंग सब भंग हो गए
कोई हाथ पर शीश धरे .जिनके -------
दिन पर दिन यूँ रहे गुजरते
बलिवेदि कि झोली भरते
फाँसी  के फंदो  में झूले
जेलों की दल दल में सड़ते
अग्नि के शोलों से खींच कर
लाए देश में वे आजादी
आजादी के दीवानों को
युग युग हम प्रणाम करें
जिनके रक्त से रंजित धरती
उन वीरों का ध्यान करें .
                              "चरण"
जिनके कंधों पर भरोसा करके बैठे ,
अब वही संबल कहर ढाने लगे हैं .
                                             "चरण"

Thursday, August 11, 2011

गाँधी वादी

आज लगी नकली नामों पर गाँधी जी की छाप
यह कैसे कुछ समझ ना आया संभव है पूछेगे आप
तो सुनिये यह लंबी गाथा छोटी कर समझा देता हूँ
उलट फेर की बात नहीं सीधी  सीधी बतला  देता हूँ
--चमक विदेशी सूट पहनते घर सम्मु खादी  भंडार
और राष्ट्र गीतों पर कर दी-अँगरेजी कि धुन्न सवार
बहुत दिनों तक पता चला ना ये बंधु गाँधी वादी हैं
गाँधी जी को गुरु मानते सिगरेट पीने के आदी हैं .
--और एक दिन चौराहे पर लगी हुयी थी भीड़ बड़ी
हमने भी मारा ब्रेक और कर दी साइकिल वहीं खड़ी
देखा एक अकेले जन  को बहुतेरे मिल पीट रहे थे
और बेचारे पीटने वाले रो रो  करके चींख रहे थे
छान बीन कर ग्यात  हुआ कि आप श्री गाँधी वादी हैं
जेब काटने के धंदे में डबल तिबल पी एच डी हैं .
--गत मंगल सब्जी मंडी में खड़े हुए थे एक साहब जी
एक हरिजन कि साइकिल गलती से उनसे जा टकराए
नेता जी ने मारा थप्पड़ और दो गाली भी दे डाली
नहीं ग्यात गाँधी वादी हूँ कर दूँगा भेजा खाली .
--अब मिलिये श्री मोहन दास  से ये हैं इनकम टैक्स ऑफिसर
वेतन बैंक सम्भाले इनका और रिश्वत से चलता घर
ऐसे ही श्री करमचंद भी दीनो का ही रक्त पियेन
अपने बच्चे रहें सलामत औरों के चाहे मरें जियेन .
                                                                   "चरण"
लोग पीते हैं लड़खड़ाते हैं और नाली में  गिर जाते हैं उनेह कोई कुछ नही कहता ,और हमने थोड़ी सी पी ली तो हंगामा .
                "चरण"
स्वतंत्रता का अर्थ है कि दूसरे हमारे लिए मरें और उनेह शहीद मानने  के नाम पर हम कॉफी हाउस में बैठ कर एक दूसरे से लड़ें .
                                   "चरण"

अपहरन के बाद

एक बेचारे किस्मत के मारे  ने एक सेठ की पत्नी का कर डाला अपहर
और सेठ को एक पत्र  लिखा
महाशय
आपको सूचित किया जाता है
आपकी पत्नी हमारे कब्जे में है
पचास हजार रुपये ले आइए
और छुड़ा कर ले जाइए
दूसरे दिन
नियत  समय पर सेठ तो नही आया
किंतु उसका नौकर एक पत्र ले आया
पत्र में लिखा था
दोस्त धनियवाद
जो तुमने मुझे पत्नी से मुक्त कराया
कुछ दिन बाद
उसी अपहरन करता का पत्र
फिर सेठ के पास वापिस आया
लिखा था
सेठ जी
अब मैं आपको पचास हजार रुपये दूँगा
कृपया मेरी जान बचाईये
आकर अपनी पत्नी को ले जाईये .
                                           "चरण"

Wednesday, August 10, 2011

दो आधुनिकाये

एक दिन
एक आधुनिक मा
और एक आधुनिक पुत्री
सड़क पर जा रहीं थी
आस पास वालों पर बिजली गिरा रहीं थी
चौराहे पर
एक मनचले युवक ने सीटी  बजाई
दोनों आधुनिका  ने दृष्टि घुमाई
बारी  बारी से अंखिया  मिलायी
मुस्करायी
और चली इं
दूसरे दिन
उसी स्थान पर
अकेली पुत्री फिर उस युवक से टकराए
मुस्करा अंखिया  मिलायी
किंतु युवक खामोश रहा
फिर युवती ही फुस्फुसायी
कल तो सीटी  बजा रहा था
आज नखरे दिखा रहा है
युवक बोला
देवी आपको ग़लत फहमी हुयी है
मेरी नीयत जरूर दगमगायी थी
किंतु आप पर नहीं
मैंने तो आपके साथ वाली को देखकर
सीटी बजाई थी .
                                 "चरण"
छत फाड़  कर आए हुए सुख  पर ना फूलिये ,
इस हड़बड़ी में दोस्त ना औकात भूलिये .
                                                     "चरण"

Tuesday, August 9, 2011

गरीब की पहचान

गरीब की पहचान
नेता ने गंगाराम से पूछा
क्या सबूत है तुम्हारे पास
कि तुम गरीब हो
गंगाराम ने हाथ जोड़े
बोला माई  बाप
यह कहावत  तो आप ने सुनी  होगी
गरीब की जोरु सबकी भाभी
तो सरकार
मेरी धन्नो को
यानि कि मेरी औरत को भी
सब मोहल्ले वाले भाभी कहते हैं .
                                           "चरण"

वक्त पहरेदार है

वक्त पहरेदार है जाने नहीं देगा
भीतर परिंदे को भी आने नही देगा
जितना चाहे आप पंख फरफराइये
संदेश मुक्ति का अभी लाने नही देगा
ता पर रखिए सजा कर साज़ अपने
आपकी इच्छा से वह गाने नही देगा
क्या करेंगे आप लबादा उतारकर
घाव किसी को भी दिखाने  नही देगा
भूलकर प्रतिज्ञा किसी से ना कीजिये
वक्त जालिम है निभाने नही देगा
पैदा करेगा अड़चनें हर शुभ कर्म  में
आपको यह पुण्य कमाने नही देगा
नजरें झुका नाखून से धरती कुरेदिये
सिर आपको ऊपर ये उठाने  नही देगा
वक्त अब चालाक हो गया है दोस्त
पैर अब अंगद को जमाने नही देगा .
                                           "चरण"